6 Jun 2012
वार्तालाप: नदी और पेड़
मान
लें कि मानव के अनियंत्रित
हस्तक्षेप से प्रदूषित
और
नाशोन्मुख नदी किनारे के एक
पेड़ से अपनी व्यथा
सुनाती
है। वह संभावित वार्तालाप
तैयार करें।
नदी-पेड़:
वार्तालाप
पेड़:
इतनी
दुखी क्यों हैं?
नदी:
क्या
बताऊँ,
मेरी
हालत देखिए न कितनी
शोचनीय
है।
पेड़:
क्या-क्या
कठिनाइयाँ हो रही हैं?
नदी:
मेरा
जल देखो,
इसे
इतना प्रदूषित बना दिया
है
कि उपयोग करना असंभव बन गया
है।
पेड़:
ऐसा
क्यों हो रहा है इसके पीछे
किसके हाथ हैं?
नदी:
मैं
सभी पशु-पक्षियों,
मानव,
पेड़-पौधे
आदि
सबकी
सेवा करना चाहती हूँ। लेकिन
मुझे तो
बदले
में पीड़ा ही मिलती है।
पेड़:
आपको
सबसे ज़्यादा पीड़ा और तायनाएँ
किसकी
ओर से हो रही हैं?
नदी:
इस
जगत में सबसे बुद्धिमान तो
मानव माने जाते
हैं।
लेकिन वही मानव मेरी इस हालत
का
मुख्य
कारण है।
पेड़:
मानव
कैसे आपको प्रदूषित और अनुपयोगी
बना
देता है?
नदी:
मानव
अपनी सुख-सुविधाएँ
बढ़ाने के लिए जो
नए-नए
आविष्कार करते हैं वे सब मेरे
लिए
अत्यंत
दोषकारी बन जाते हैं। प्लास्टिक
जैसे
सारे
कूड़े-कचड़े
मेरे ऊपर फेंक दिए जाते हैं।
पेड़:
ये
सारे कारखाने आदि अपके किनारों
पर ही
स्थित
हैं न?
नदी:
ज़रूर।
वहाँ से निकलते मालिन्य,
विषैले
जल
आदि
अत्यंत मारक हैं। उसके बारे
में सोचते ही
मुझे
डर होता है।
पेड़:
आपका
जल के उपयोग से मानव खेती करता
है।
बदले
में उसका व्यवहार कैसा है?
नदी:
वह
भी निर्दय है। जनसंख्या वृद्धि
के साथ ज़्यादा
अनाज
पैदा करना आवश्यक बन गया। तब
अंधाधुंध
कीटनाशी दवाइयों का प्रयोग
शुरू
किया
गया है। वह भी मेरे
जल से ही मिल
जाती
हैं।
पेड़:
अच्छा
ये सब कैसे बदलेगा?
नदी:
हमारे
चिंता और विचार से मात्र इसका
समाधान
नहीं
होगा। मानव ही इसका समाधान
कर सकता है।
पेड़:
हम
प्रार्थना करें कि इस मानव
को ऊपरवाला
अच्छी
बुद्धि दें।
8 May 2012
नदी और साबुनः शेष अंश
ज्ञानेन्द्रपति
की कविता
'नदी
और साबुन' का
शेष अंश
एक
नीली साबुन-बट्टी
वह
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी का
बहुप्रचलित
साबुन है।
दुखियारी
महतारी हे गंगाट
उसका
जी काँपता है डर से
उसकी
प्रतिद्वन्द्वी हथेली-भर
की वह
जो
साबुन की टिकिया है
इजारेदार
पूँजीवाद की बिटिया है
उसका
महाबली झाग उठने से पहले
गंगा
के दिल में हौल उठता है।
(महतारीः
माँ, महाबलीः
अत्यंत शक्तिशाली,
बट्टीः
छोटी गोल लोटिया-टिकिया,
इजारेदारः
ठेकेदार,
हौलः
डर, भय)
प्रस्तुतिः
रवि,
चिराग
26 Apr 2012
IX Hin Mar 2012 Answers (A model)
Department
of General Education, Kerala
Annual Examination March –
2012
Hindi Std IX
Model Answers
1.
पानी के
समाप्त हो जाने से -जिंदगानी
मिट जाएगी।
2.
नानी ने
हमें यह समझाया कि हमें पानी
व्यर्थ बहाना याने
बरबाद
करना नहीं चाहिए।
18 Mar 2012
SSLC Mar 2012 Hin Qn.: Answers (A model)
एस.एस.एल.सी. हिंदी परीक्षा मार्च 2012
उत्तर: एक नमूना
खंड – क
1. क्रमबद्ध घटनाएँ: 2
अ) गौरा एक पुष्ट सुंदर वत्स की माता बनी।
आ) दो-तीन मास के उपरांत गौरा ने दाना-चारा खाना बहुत कम कर दिया।
इ) गौरा का मृत्यु से संघर्ष आरंभ हुआ।
ई) सुई ने हृदय को बेधकर बंद कर दिया।
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